सोमवार, २० ऑक्टोबर, २०१४

भारतके ब्रांड Ambassadar बनते तो कुछ और बात होती. 

महानायकने १९८४ मे राजीव गांधीके कहनेपर अलाहाबादसे लोकसभाका चुनाव लडा था और जिता था. बच्चन परिवार और नेहरू परिवारमें पारिवारिक संबंध थे. लेकिन तत्कालीन विरोधी राजनैतिक दलोने उनपर बोफोर्स मामलेको लेकर काफी छीटाकशी की और उन्होने संसदसे त्यागपत्र दिया. बादमे उनकी कंपनी ABCL  (Amitaabh bachhan corporation limited) आर्थिक संकटंमें पडी तो अमरसिंगजीने उन्हे मदद की और महानायक समाजवादी पार्टीके समर्थक बने और उनकी पत्नी जयाजी राज्यसभा सदस्य. एक संकट उनपे और भी आया था. उन्होने महाराष्ट्रमे  कुछ कृषी जमीन खरीदी थी. महाराष्ट्रमें एक कानुनी प्रावधान हैं की महाराष्ट्रमें केवल कोई किसान ही कृषी जमीन खरीद सकता हैं. पुणे जीलेके एक रेवेन्यु अधिकारीने बच्चनजीको कानुनी नोटीस दिया. ये किस्सा मिडीयाने काफी उछाला और तभी शांत हुआ जब बच्चनजीने किसान होनेका प्रमाणपत्र युपीसे एक हासिल किया. उस प्रमाणपत्र की असलियतपर भी मिडीयाने शंकाये उपस्थित की थी. इसके बाद बच्चनजी युपीके ब्रांड ambassdar  बन गये और उत्तर प्रदेशको उत्तम प्रदेश कहने लगे. और बादमे गुजरातके ब्रांड ambassadar बने और आओ गुजरात गुनागुनाने लगे. लेकिन सारा भारत उन्हे महानायक कहता हैं इसलिये वो अगर प्रादेशिकता
से उपर उठकर भारतके ब्रांड ambassadar बनते तो वो असलमे महानायक कहलाते. अभीभी चान्स हैं

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