शुक्रवार, १७ जुलै, २०२०

पेशवाईतील कलंकीत अध्याय 
"... माधवराव पेशवा बनाया गया इस कारण से रघुनाथ राव और माधवराव की लड़ाई छिड़ गई । रघुनाथ राव को जेल में कैद कर लिया। हालांकि माधवराव पेशवा की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई नारायण राव ने रघुनाथ राव को जेल से बाहर कर लिया जिस कारण से रघुनाथ राव ने गर्दी सैनिकों द्वारा जो कि अंगरक्षक थे उन्होंने रघुनाथ राव के भतीजे नारायणराव को गणेश चतुर्थी के दिन 1773 में रघुनाथ राव ने अपने सैनिकों द्वारा मरवा दिया। नारायण राव की उम्र 18 वर्ष थी। नारायणराव लगातार अपने चाचा रघुनाथ राव से मदद मांगता रहा परंतु रघुनाथ राव ने उसकी कोई भी मदद नहीं की वह भागता भागता रघुनाथराव के कमरे में पहुंचा परंतु रघुनाथ राव ने उसकी मदद करने से इंकार कर दिया जिसके बाद नारायणराव का वध कर दिया गया और उसके शरीर के टुकड़े करके नदी में फेंक दिया गया। नारायण राव की किसी ने मदद नहीं की यह रघुनाथ राव के सिर पर सबसे बड़ा कलंक है। परंतु उसके बाद रघुनाथराव पेशवा फिर नहीं बनने दिया गया इस बार नारायण राव के 1 वर्षीय पुत्र माधवराव पेशवा जिन्हें माधवराव द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है उनको मात्र 1 वर्ष भी कमाल की उम्र में पेशवा चुन लिया गया। कई सारे मंत्रियों ने जिन्हें 12 भाई समिति का निर्माण किया और उन्होंने माधवराव पेशवा बनाया और उसके बाद रघुनाथराव शनिवारवाड़ा छोड़कर भाग गए और अंग्रेजों से जा मिले जिसके कारण प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध छिड़ गया जिसमें मराठों की जीत हुई और अंग्रेज और रघुनाथ राव हार गए। 1783 में पेशवा पद से पूर्ण रुप से रघुनाथ राव छिन गया और राव की मृत्यु हो गई।..."  https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%98%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत: