गुरुवार, ९ ऑक्टोबर, २०१४

समझदारी, सुझबुझ और प्रगल्भता की अनोखी मिसाल
२००१ मे बांगला देश की सैनिकोने बिएसफ के १६ जवानोको मार डाला. इस बातसे देशभरमे असंतोष की लहर दौड गयी. विपक्ष चाहता तो इस बात को लेकर वाजपेयी सरकारको घेर सकता. लेकिन विपक्षने परिपक्वता का परिचय दिया और इसे सरकारकी साख मिटानेके लिये भूनाया नही और राष्टीय आपत्ती मानते हुये सरकारके साथ पुरा सहयोग दिया. ऐसी बात और कहा. अगर आजके सत्ताधारी उस समय विपक्षमे  होते तो कितना हंगामा करते और सारी दुनियाको तमाशा दिखाते इसका अंदाजा लागाय जा सकता है.

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